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संगम नगरी प्रयाग में गंगा की दुर्दशा: Namami Gange Project Fails to Improve Conditions

संगम नगरी प्रयाग में गंगा की दुर्दशा: Namami Gange Project Fails to Improve Conditions

संगम नगरी प्रयाग में गंगा की दुर्दशा: नमामि गंगे प्रोजेक्ट पर सवाल

प्रयागराज – त्रिवेणी संगम की नगरी प्रयाग, जिसे गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम के कारण मोक्षदायिनी माना जाता है, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जहां एक ओर महाकुंभ की तैयारी जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर दारागंज गऊघाट और दशाश्वमेघ घाट पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और गंदगी का अंबार है।

आम जनता की परेशानी और गंगा की दुर्दशा

गऊघाट शमशान घाट पर शवों के दाह-संस्कार के लिए आए लोगों को अत्यधिक शुल्क चुकाना पड़ता है। जनता का आरोप है कि न तो पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध है और न ही बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था। शवों को जलाने के लिए मनमाने दाम मांगे जाते हैं, और अधजले शव इधर-उधर पड़े रहते हैं, जिन्हें जानवर नोचते हैं। यह स्थिति गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है, जो आम जनता के लिए बेहद खतरनाक है।

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महाकुंभ की तैयारी और सवालों के घेरे में नमामि गंगे

सरकार महाकुंभ की तैयारी में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन सवाल यह उठता है कि ये पैसा आखिर जा कहां रहा है? गंगा के तटों पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विकास कार्यों का निरीक्षण करने के बावजूद, गऊघाट शमशान घाट और आसपास की स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों ने सीएम को आधा सच दिखाया, जबकि वास्तविकता में घाटों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है।

जनता का आक्रोश और नगर निगम पर सवाल

नगर निगम के अधिकारी और सफाई कर्मचारियों की लापरवाही से जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि अरबों रुपए खर्च होने के बाद भी संगम की नगरी प्रयाग में कोई सुधार नहीं हुआ है। घाटों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, और सफाईकर्मियों का कहीं अता-पता नहीं है। लोग चिलचिलाती धूप में पेड़ों की छांव के नीचे बैठने को मजबूर हैं।

संगम नगरी प्रयाग में गंगा की दुर्दशा-Namami Gange Project Fails

Namami Gange Project पर सवाल

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने अरबों रुपए खर्च किए हैं, लेकिन गऊघाट और दशाश्वमेघ घाट की दयनीय स्थिति देखकर सवाल उठते हैं कि यह पैसा आखिर कहां जा रहा है? गंगा, जिसने करोड़ों लोगों के पाप धोए, आज खुद अपनी सफाई के लिए तरस रही है। जनता का सवाल है कि गंगा की गंदगी को आखिर कौन धोएगा?

संगम नगरी प्रयाग में गंगा की बदहाली और शमशान घाटों की दुर्दशा से जनता बेहद नाराज है। अरबों रुपए खर्च होने के बावजूद भी घाटों पर बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। महाकुंभ जैसे महापर्व की तैयारी के बीच, प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही ने नमामि गंगे परियोजना की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता की आवाज़ यही है कि गंगा की सफाई और घाटों की व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, ताकि इस पवित्र नगरी का धार्मिक महत्व बनाए रखा जा सके।

Jyoti Gupta

मैं ज्योति गुप्ता पिछले तीन वर्षों से "सूचना इंडिया - इंडिया की आवाज़" के साथ काम कर रही हूँ। नगर निगम, विद्युत विभाग, और नगर विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की रिपोर्टिंग के साथ-साथ, मेरा कार्यक्रम "सुलगता सवाल" लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। "सूचना इंडिया आपके द्वार" के माध्यम से भी मैं समाज के मुद्दों को सामने लाने का काम करती हूँ।

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