जागरूकता, नई गाइडलाइंस और AI तकनीक पर चर्चा—देश के प्रमुख पल्मोनरी विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव 📍 लखनऊ। विश्व अस्थमा दिवस 2026 के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS), लखनऊ के श्वसन रोग विभाग द्वारा “Advances in Asthma Care” विषय पर एक भव्य Continuing Medical Education (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
🟥 अस्थमा जागरूकता और आधुनिक उपचार पर फोकस इस शैक्षणिक कार्यक्रम में फैकल्टी, रेजिडेंट डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और मेडिकल विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, आधुनिक उपचार पद्धतियों को साझा करना और जटिलताओं की रोकथाम पर चर्चा करना रहा।
🟥 वैश्विक गाइडलाइंस और इनहेलर थेरेपी पर जोर कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अस्थमा प्रबंधन की नवीनतम अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस पर प्रकाश डालते हुए प्रारंभिक पहचान, एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर थेरेपी और साक्ष्य-आधारित उपचार की अहमियत बताई।
🟥 समय पर पहचान से बच सकती है जान संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह ने कहा कि अस्थमा के लक्षणों की समय पर पहचान और उचित इलाज से मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित फॉलोअप से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
🟥 उपचार की पहुंच आज भी बड़ी चुनौती सीएमएस प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह ने कहा कि आधुनिक उपचार उपलब्ध होने के बावजूद सभी मरीजों तक पहुंच सुनिश्चित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है, खासकर विकासशील देशों में।
🟥 गंभीर अस्थमा में बायोलॉजिक थेरेपी की भूमिका संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रो. (डॉ.) आलोक नाथ ने गंभीर अस्थमा के इलाज में बायोलॉजिक थेरेपी, एलर्जी इम्यूनोथेरेपी और नई इनहेल्ड तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी।
🟥 टीकाकरण और सुपरस्पेशलिटी शिक्षा पर जोर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने अस्थमा और COPD जैसे रोगों में टीकाकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान में जल्द ही पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन में DM पाठ्यक्रम शुरू होने की संभावना है।
🟥 हर सांस फूलना अस्थमा नहीं—सही जांच जरूरी मेडिसिन विभाग की डॉ. मृदु सिंह ने बताया कि हर घरघराहट या सांस फूलने को अस्थमा मान लेना सही नहीं है, सही निदान बेहद जरूरी है।
🟥 इनहेलर को लेकर भ्रांतियां सबसे बड़ी बाधा पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय सिंह ने कहा कि इनहेलर को लेकर समाज में कई मिथक हैं, जो उपचार में बाधा बनते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनहेलर सुरक्षित, प्रभावी और कम दुष्प्रभाव वाले होते हैं।
🟥 AI तकनीक पर विशेष कार्यशाला कार्यक्रम का विशेष आकर्षण “Artificial Intelligence for Healthcare Professionals” विषय पर कार्यशाला रही, जिसका संचालन बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के डॉ. निमिष कपूर ने किया।
🟥 आयोजन टीम और संचालन कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा (Organizing Chairman) और डॉ. मृत्युंजय सिंह (Organizing Secretary) के नेतृत्व में हुआ। आयोजन समिति में डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. सुलक्षणा गौतम और डॉ. पुलकित गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमन सक्सेना और डॉ. सागर जैन ने किया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मृत्युंजय सिंह और डॉ. पुलकित गुप्ता द्वारा दिया गया।
🟥 जागरूकता बढ़ाने पर जोर विश्व अस्थमा दिवस पर आयोजित यह CME न केवल चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। 📺 देखिए स्वास्थ्य से जुड़ी हर बड़ी खबर—सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल पर
मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल
मनीष मिश्रा पिछले 7 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।