राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में थायरॉइड नोड्यूल के minimally invasive उपचार की नई तकनीक शुरू

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने थायरॉइड रोगियों के लिए बड़ी राहत की शुरुआत की है। संस्थान के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग ने 29 जुलाई को सौम्य थायरॉइड नोड्यूल के माइक्रोवेव एब्लेशन की पहली प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। यह प्रक्रिया 3×2.5 सेमी आकार के नोड्यूल पर की गई, जिससे संस्थान में पहली बार न्यूनतम इनवेसिव थायरॉइड उपचार संभव हुआ है।
थायरॉइड नोड्यूल, गर्दन में स्थित थायरॉइड ग्रंथि में विकसित होने वाली छोटी सौम्य गांठ होती है। इससे रोगी को निगलने में तकलीफ, हार्मोन असंतुलन और गर्दन में असुविधा जैसे लक्षण हो सकते हैं। समय पर निदान और अत्याधुनिक तकनीक से उपचार से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार होता है।
माइक्रोवेव एब्लेशन: नई उम्मीद
यह नवीनतम और सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमें केवल एक सुई के माध्यम से नोड्यूल में माइक्रोवेव ऊर्जा प्रवाहित की जाती है। प्रक्रिया पूरी तरह टांके रहित, दर्द रहित और डे-केयर बेसिस पर की जाती है, जिससे मरीज कुछ घंटों में ही अस्पताल से घर लौट सकते हैं।
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एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक का उपयोग स्तन ग्रंथियों के सौम्य रोगों के इलाज में भी प्रभावी है। विभाग ने कहा कि वे थायरॉइड, पैराथायरॉइड, एड्रेनल और स्तन रोगों के समर्पित और सुरक्षित इलाज के लिए कृतसंकल्प हैं।
इस नई minimally invasive तकनीक के आने से उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के हजारों थायरॉइड रोगियों को लाभ होगा।


