16 करोड़ की नाला सफाई पर बारिश ने उठाए सवाल, जलभराव ने खोली मानसून तैयारियों की परतें
Mishra Manish1 hour agoLast Updated: August 17, 2026
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घरों तक पहुंचा पानी तो फिर सवाल—नालों की सफाई पर खर्च हुई रकम का असर जमीन पर क्यों नहीं दिखा? अभियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
लखनऊ। राजधानी में हुई मूसलाधार बारिश ने लखनऊ नगर निगम की मानसून से पहले की तैयारियों को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया। शहर के कई इलाकों में सड़कें पानी में डूबीं, नाले उफनाए और कई जगह पानी घरों तक पहुंच गया। लोग अपने घरों और सामान को पानी से बचाने की जद्दोजहद करते नजर आए। सूचना इंडिया ने रविवार को शहर के अलग-अलग इलाकों की यह जमीनी तस्वीर प्रमुखता से सामने रखी।
लेकिन बारिश थमने और पानी उतरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जलभराव से ज्यादा उस व्यवस्था का है, जिस पर मानसून से पहले करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
🔴 16 करोड़ खर्च, फिर सड़कों और घरों में पानी क्यों?
नगर निगम द्वारा मानसून से पहले नाला-नाली सफाई पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि नालों की सफाई निर्धारित मानकों के अनुसार हुई तो कुछ घंटों की तेज बारिश में ही कई इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था क्यों जवाब दे गई?
यह जरूरी नहीं कि हर जलभराव के लिए केवल नाला सफाई ही जिम्मेदार हो। अत्यधिक बारिश, नालों की क्षमता, अतिक्रमण, सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क की तकनीकी कमियां भी कारण हो सकती हैं। लेकिन जहां सफाई पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ है, वहां यह जांच भी जरूरी है कि कितना काम कागज पर हुआ और कितना जमीन पर।
🔴 पुरानी व्यवस्था में तय हुई थी ठेकेदार की जवाबदेही
पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह के कार्यकाल में नाला सफाई को लेकर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था की बात कही गई थी। जिस क्षेत्र में सफाई के बावजूद जलभराव होता, वहां संबंधित ठेकेदार के कार्य की जांच कर भुगतान से कटौती किए जाने की बात सामने आई थी।
यह व्यवस्था अपने आप में महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे सरकारी धन के साथ परिणाम की जवाबदेही भी जुड़ती है। अब जरूरत यह देखने की है कि मौजूदा व्यवस्था में कितने नालों का भौतिक सत्यापन हुआ, कितने ठेकेदारों के काम में कमी मिली और कितनों के भुगतान में वास्तव में कटौती की गई।
🔴 अभियंत्रण विभाग पर सबसे बड़ा सवाल
जलनिकासी और नाला सफाई की व्यवस्था में अभियंत्रण विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए बारिश के बाद केवल सफाई कर्मचारियों या निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर देना पर्याप्त नहीं होगा। कार्ययोजना बनाने, टेंडर कराने, काम की निगरानी करने और भुगतान से पहले गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी समान रूप से तय होनी चाहिए।
नगर आयुक्त गौरव कुमार बैठकों में अभियंत्रण विभाग को लगातार निर्देश देते और लंबित कार्यों को लेकर नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। इसके बावजूद विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खत्म नहीं हो रहे हैं।
विभाग के कुछ अभियंताओं के स्थानांतरण के बावजूद उनके कार्यमुक्त न होने को लेकर भी निगम के भीतर चर्चाएं हैं। प्रशासन को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी अधिकारी या विभाग को लेकर अनावश्यक अटकलों के बजाय तथ्य सामने आ सकें।
🔴 डांट से आगे बढ़कर अब परिणाम दिखाने की जरूरत
नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में बैठक, निर्देश और चेतावनी अपनी जगह हैं, लेकिन जनता आखिरकार परिणाम देखती है। जब सार्वजनिक धन खर्च होने के बाद भी पानी लोगों के दरवाजे तक पहुंचता है तो सवाल अधिकारियों से ही पूछे जाएंगे।
अब आवश्यकता है कि नगर निगम जोनवार नाला सफाई पर हुए खर्च, संबंधित ठेकेदार, सत्यापन करने वाले अभियंता, भुगतान की स्थिति और जलभराव वाले स्थानों की रिपोर्ट सार्वजनिक करे। इससे यह भी साफ होगा कि कमी ठेकेदार के काम में थी, निगरानी में थी या शहर के ड्रेनेज नेटवर्क को ही बड़े तकनीकी सुधार की आवश्यकता है।
🔴 सवाल 16 करोड़ रुपये का ही नहीं, भरोसे का भी है
बारिश का पानी कुछ घंटों या दिनों में उतर जाएगा, लेकिन इस बारिश ने जो सवाल छोड़े हैं, उनका जवाब जरूरी है। सार्वजनिक धन केवल फाइलों में खर्च दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जनता को राहत देने के लिए होता है।
यदि नाला सफाई सही हुई है तो उसके परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए। और यदि काम में कमी रही है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए—चाहे वह ठेकेदार की हो, निगरानी करने वाले अभियंता की या व्यवस्था के किसी दूसरे स्तर की।
क्योंकि सवाल केवल यह नहीं है कि लखनऊ में पानी क्यों भरा; असली सवाल यह है कि जलभराव रोकने के लिए खर्च हुए करोड़ों रुपये के बाद भी राजधानी को वही पुरानी तस्वीर क्यों देखनी पड़ी?
मनीष मिश्रा राज्य संवाददाता, सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल
मनीष मिश्रा पिछले 8 वर्षों से सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के साथ राज्य संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं, और लखनऊ नगर निगम से संबंधित खबरों को गंभीरता के साथ जनता के समक्ष लाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ शहर के नागरिकों के सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवर और सफाई जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं को नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी रिपोर्टिंग की बदौलत नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया और निस्तारण के लिए सक्रिय कदम भी उठाए। मनीष का उद्देश्य हमेशा से जनहित के मुद्दों को उजागर करना और प्रशासन को जिम्मेदार बनाना रहा है, जिसके लिए वह पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।