लखनऊ स्मार्ट सिटी जलभराव: सिद्धार्थ पुरम में हालात बेकाबू, नगर निगम बेपरवाह

लखनऊ स्मार्ट सिटी की हकीकत: सिद्धार्थ पुरम जलभराव से बेहाल, प्रशासन बेपरवाह
मनीष मिश्रा / सूचना इंडिया
लखनऊ। एक ओर लखनऊ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर खरगापुर सरसवां वार्ड के सिद्धार्थ पुरम में दो महीने से लगातार जलभराव की समस्या से स्थानीय निवासी त्रस्त हैं। यह क्षेत्र नगर निगम लखनऊ के जोन-4 में आता है, लेकिन अधिकारियों की उपेक्षा ने इसे बदहाल बना दिया है।
स्थानीय निवासियों की व्यथा
हरिहरनाथ त्रिवेदी सहित कई स्थानीय निवासियों ने बताया कि 21 जून को महापौर सुषमा खर्कवाल से मुलाकात कर जलभराव की समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। महापौर ने आश्वासन दिया था कि कार्य जल्द शुरू होगा, लेकिन अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा ने महज मालवा डलवाकर इतिश्री कर दी।
बारिश ने बढ़ाई समस्या
बारिश शुरू होते ही यह समस्या और भयावह हो गई है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल, बीमारियों का खतरा बढ़ा, और लोग घरों में कैद हो गए हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जब भी जोनल अधिकारी और अधिशासी अभियंता को कॉल किया जाता है, उनका फोन तक नहीं उठता।
प्रशासनिक उपेक्षा पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बार-बार सूचना देने के बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते, तो यह साफ दर्शाता है कि प्रशासनिक लापरवाही चरम पर है। इस समस्या का सीधा असर जनता के स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।
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नगर आयुक्त से आस
अब क्षेत्रवासियों की आखिरी उम्मीद नगर आयुक्त गौरव कुमार से है। निवासियों ने पुनः महापौर को पत्र सौंपकर समाधान की मांग की है। नागरिकों की मांग है कि तत्काल जल निकासी की व्यवस्था की जाए और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
स्मार्ट सिटी या सिर्फ दावा?
लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो रही है, लेकिन सिद्धार्थ पुरम की हालत इस दावे की हकीकत बयान करती है। इस समस्या ने यह दिखा दिया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना सिर्फ कागजों पर स्मार्ट है, जमीनी सच्चाई कुछ और ही है।
अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा का बयान
“चढ़ाई का पुरवा क्षेत्र के लिए 15वें वित्त आयोग में प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू होगा। अभी के लिए स्वेज इंडिया को पानी निकासी के निर्देश दिए गए हैं।”
— अतुल मिश्रा, अधिशासी अभियंता, जोन-4
स्मार्ट सिटी लखनऊ के दावे तब तक खोखले ही रहेंगे, जब तक सिद्धार्थ पुरम जैसे इलाकों में बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता। प्रशासनिक सजगता और समयबद्ध कार्रवाई ही जनता का विश्वास लौटाएगी।

