लखनऊ नगर निगम ज़ोन-3 की पोल खुली: बिना अतिक्रमण हटाए कर दी गई नाले की सफाई, जनता में आक्रोश
‘दो साल बेमिसाल’ या जलभराव की बुनियाद? लखनऊ में बिना कार्रवाई नाले की सफाई पूरी

लखनऊ। नगर निगम ज़ोन-3 के अभियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर जनता की परेशानी और सरकारी लापरवाही का प्रतीक बन गई है। करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा, और यही कारण है कि इस मानसून में भी जलभराव का संकट मंडरा रहा है।
नाले की सफाई सिर्फ कागज़ों पर पूरी
राम राम बैंक चौराहे से लेकर जीएसआई आवासीय परिसर और फिर सेक्टर-पी अलीगंज से बेलीगारद गांव तक फैले मुख्य नाले की सफाई पूरी दिखा दी गई है, लेकिन अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। जगह-जगह वेंडिंग जोन पर अवैध कब्जा, ठेले-खोमचे और पक्के निर्माण मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि ना तो इन्हें हटाया गया, ना ही कोई नोटिस जारी हुआ।
प्रश्न उठता है: जब नाला ही अवरुद्ध है, तो फिर सफाई कैसे और कहां हुई?
‘दो साल बेमिसाल’ या जलभराव की नींव?
राज्य सरकार का प्रचार अभियान ‘दो साल बेमिसाल’ इन दिनों चर्चा में है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इसके विपरीत है। यदि इस तरह की बिना अतिक्रमण हटाए दिखावटी सफाई को बेमिसाल कार्य कहा जा रहा है, तो जनता सवाल कर रही है—क्या यही है अच्छे शासन की मिसाल?
जनता डरी, बारिश से पहले ही संकट
सेक्टर-पी अलीगंज, जो पहले ही बारिश के मौसम में डूबने वाला इलाका रहा है, वहाँ के निवासी डरे हुए हैं। पिछले सालों में बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं, और अब इस बार भी वैसी ही आशंका है। वार्ड महाकवि जयशंकर प्रसाद क्षेत्र के लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
“अगर इस बार भी जलभराव हुआ, तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी होगी?” — यह सवाल अब पूरे शहर में गूंज रहा है।
नगर आयुक्त और महापौर से जनता की उम्मीदें
नए नगर आयुक्त लखनऊ से क्षेत्रीय जनता अपील कर रही है कि वो खुद निरीक्षण करें और जांच कराएं कि नाले की सफाई रिपोर्ट को किस आधार पर पूरा माना गया? साथ ही यह भी जांच हो कि किन अधिकारियों की लापरवाही इस हालात के लिए ज़िम्मेदार है।
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महापौर लखनऊ से भी सवाल किया जा रहा है कि क्या उन्हें इस घोटाले जैसी स्थिति की जानकारी है? और यदि हां, तो क्या करोड़ों रुपये के बजट का दुरुपयोग उचित है?
पीली पर्ची और वेंडिंग जोन: एक और बड़ा सवाल
वेंडिंग जोन में अवैध कब्जा और ‘पीली पर्ची’ का बोलबाला नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। बिना किसी निष्पक्षता के सड़क किनारे कारोबारियों को हटाए बिना नाले की सफाई पूरी बता देना प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनता की मांग: पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्रवाई
- नाले की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए।
- बिना अतिक्रमण हटाए सफाई रिपोर्ट खारिज की जाए।
- ज़िम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
- नगर आयुक्त स्वयं मौके का निरीक्षण करें।
लखनऊ नगर निगम ज़ोन-3 में जो कुछ भी हुआ, वह एक आम जनता के साथ विश्वासघात जैसा है। बिना अतिक्रमण हटाए नाले की सफाई की बात करना सिर्फ बजट निपटाने का तरीका है, ना कि विकास का कोई प्रमाण। यदि प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया, तो इस मानसून में लखनऊ फिर से डूब सकता है।



