Corruption in Lucknow Nagar Nigam: सरोजिनी नगर में ₹70 लाख के घोटाले का पर्दाफाश
Corruption in Lucknow Nagar Nigam: ₹70 Lakh Scam Exposed in Sarojini Nagar Ward

₹70 लाख का विकास, ₹35 लाख की उड़ान: लखनऊ नगर निगम में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा
लखनऊ नगर निगम के सरोजिनी नगर द्वितीय वार्ड में विकास कार्यों का हाल भ्रष्टाचार का एक नया मॉडल पेश कर रहा है। स्थानीय पार्षद रामनरेश रावत ने मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री को शिकायत कर इस मुद्दे को उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नाली और इंटरलॉकिंग का निर्माण ₹70 लाख के बजट से हुआ था, लेकिन काम मात्र ₹35 लाख में पूरा कर लिया गया। शेष ₹35 लाख कहां गए, यह सवाल अब हर नागरिक की जुबान पर है।
घटिया निर्माण की कहानी
लखनऊ नगर निगम में भ्रष्टाचार की यह घटना नालियों और इंटरलॉकिंग की घटिया सामग्री के उपयोग से उजागर हुई। निर्माण कार्य कुछ महीनों में ही टूटने लगा, जिससे स्थानीय जनता में रोष बढ़ गया। जनता को उम्मीद थी कि उनकी गलियां चमक उठेंगी, लेकिन मिली केवल घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की नई मिसाल।
पार्षद ने उठाई आवाज
पार्षद रामनरेश रावत ने इस मामले में अधिशासी अभियंता राजीव शर्मा को शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले को दबा दिया गया। आखिरकार, पार्षद ने मुख्यमंत्री और महापौर सुषमा खर्कवाल को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

नगर निगम में भ्रष्टाचार का बोलबाला
इस प्रकरण ने नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार को उजागर किया है। घटिया सामग्री और अधूरे काम को लेकर जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। नगर आयुक्त इन्द्रजीत सिंह और मुख्य अभियंता महेश वर्मा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरोजिनी नगर द्वितीय वार्ड में विकास कार्यों का हाल कुछ ऐसा है मानो “अधिकारियों और ठेकेदारों की जोड़ी” ने इसे अपनी निजी संपत्ति समझ लिया हो। पार्षद रामनरेश रावत ने तो मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री को शिकायत करते हुए खुलासा कर दिया कि उनके इलाके में नाली और इंटरलॉकिंग का निर्माण किसी “चमत्कारी हाथ” से हुआ है, जो ₹70 लाख का बजट पाकर भी ₹35 लाख में काम निपटाने का हुनर रखता है। बाकी ₹35 लाख का क्या हुआ? शायद इसे “भ्रष्टाचार-सेविंग अकाउंट” में जमा कर लिया गया होगा।
ठेकेदार महाशय ने घटिया सामग्री का ऐसा प्रदर्शन किया कि नाली और इंटरलॉकिंग ने कुछ महीनों में ही टूटने का साहस दिखा दिया। जनता तो सोच रही थी कि उनकी गलियां स्वर्ग-लोक में तब्दील होंगी, परंतु निकला “दुनिया के आठवें अजूबे” का निर्माण, जिसे देखकर हर कोई बस माथा पकड़ ले।
पार्षद महोदय ने अधिशासी अभियंता राजीव शर्मा से गुहार लगाई, लेकिन लगता है उनकी फाइल “भ्रष्टाचार डीलक्स” में ही कहीं खो गई। आखिरकार, मुख्यमंत्री और मंत्री जी को पत्र लिखने का सहारा लेना पड़ा। अब देखना यह है कि ये नालियां फिर बनेंगी या “ढहने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड” बनाएंगी।
घोटाले में शामिल ठेकेदार और अधिकारी
इस पूरे मामले में ठेकेदार और JE नवीन चंद्र पर भी उंगलियां उठ रही हैं। पार्षद का आरोप है कि यह सब अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से संभव हुआ है।
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क्या होगी कार्रवाई?
यह देखना अब महत्वपूर्ण है कि क्या इन नालियों का फिर से निर्माण होगा या मामला भ्रष्टाचार की फाइलों में ही दब जाएगा। जनता Lucknow Municipal Corporation News में इस घोटाले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
Corruption in Nagar Nigam Lucknow और Corruption in LMC जैसे मामलों ने जनता का विश्वास हिला दिया है। सरोजिनी नगर में हुए इस घोटाले ने लखनऊ नगर निगम में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा किया है। अब यह नगर निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे और दोषियों को सजा दे।




