‘EC ने दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया’- गृह मंत्री अमित शाह, उद्धव के लिए क्यों बड़ा झटका है आयोग का ये फैसला!
महाराष्ट्र में चुनाव आय़ोग के फैसले के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना के नाम और और निशान को लेकर कहा कि चुनाव आयोग ने दूध का दूध और पानी कर दिया है। गृहमंत्री ने कहा कि UPA काल में हर मंत्री खुद को प्रधानमंत्री मानता था और प्रधांनमंत्री को भी प्रधानमंत्री नही मानते थे। उन्होंने कहा कि UPA के कार्यकाल में 12 लाख करोड़ के घोटाले हुए। इससे भारत की छवि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूल में मिल गई।
वहीं दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के हाथों ‘शिवसेना’ गंवाने के बाद उद्धव ठाकरे ने करोड़ों रुपये का फंड अपनी पार्टी में ट्रांसफर किया है। कहा जा रहा है कि ठाकरे ने शिवसेना के करोड़ों रुपये के पार्टी फंड को अपनी पार्टी ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ (UBT) के खाते में ट्रांसफर किया है। यह अमाउंट कितनी है इसको लेकर खुलासा नहीं हुआ है। उद्धव खेमे ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले समूह को ‘शिवसेना’ नाम और उसका चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ आवंटित कर दिया। इसे उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब चुनाव आयोग के फैसले के बाद उद्धव ठाकरे के खेमे के नेताओं को डर है कि शिंदे गुट अब शिवसेना भवन, स्थानीय पार्टी कार्यालयों और पार्टी फंड पर भी अपना दावा पेश कर सकता है। शिवसेना के स्थानीय पार्टी कार्यालयों को पार्टी शाखाओं के रूप में भी जाना जाता है। महाराष्ट्र टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना पार्टी के फंड को ठाकरे गुट ने ट्रांसफर किया है। इसके लिए बैंक में नया खाता खोला गया और उसमें करोड़ों का पार्टी फंड ट्रांसफर किया गया।

उद्धव के लिए क्यों झटका है आयोग का फैसला
चुनाव आयोग का फैसला इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2024 में होने हैं। उद्धव के दिवंगत पिता बाल ठाकरे द्वारा 1966 में स्थापित पार्टी के नियंत्रण से उन्हें (उद्धव को) वंचित करने का चुनाव आयोग का फैसला ऐसे समय में आया है, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और अन्य नगर निकायों के चुनाव भी होने हैं। मुंबई में नगर निकाय चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीएमसी दो दशकों से अधिक समय से शिवसेना का गढ़ रहा है।
सेना भवन पर कब्जा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है: शिंदे गुट
कानूनी विशेषज्ञ और पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि अणे कहते हैं कि अगर सेना भवन का प्रबंधन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, तो ट्रस्ट को नियंत्रित करने वाले अधिनियम के तहत ही उस विवाद का निपटारा किया जाएगा। उन्होंने कहा, “पार्टी कार्यालयओं के स्वामित्व का कोई मतलब नहीं है, हालांकि उनका भावनात्मक और राजनीतिक मूल्य होता है।” ऐसी खबरें हैं कि शिंदे गुट के शिवसेना भवन पर कब्जा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इसके प्रवक्ता नरेश म्हस्के ने कहा, “लेकिन हम वे सभी चीजें चाहते हैं जो कानूनी रूप से हमें मिलनी चाहिए।’ एक अन्य प्रवक्ता शीतल म्हात्रे ने कहा, “भवन पर दावा करने का फैसला शिंदे द्वारा लिया जाएगा। हमारी रुचि केवल प्रतीक पर थी।”
इस बीच, मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को सेना भवन के आसपास चौकसी बढ़ा दी। शिंदे के एक करीबी नेता ने कहा, “ठाकरे समूह की मुख्य चिंताओं में से एक पार्टी फंड है जो यूबीटी (शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वे इस बात से सावधान हैं कि हम उसे भी छीनने का प्रयास कर सकते हैं। तकनीकी रूप से, यह हमें मिल सकता है। लेकिन अंतिम फैसला आला अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा।” गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे और शिवसेना के कई विधायकों द्वारा उनके (उद्धव के) खिलाफ बगावत करने के बाद उद्धव ने पिछले साल जून में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।




