मकान पर कब्जा कर मांगी 10 लाख की रंगदारी,पुलिस कमिश्नर के आदेश पर FIR के बाद भी भूमाफिया पर कार्रवाई सिफर कानपुर

राजेश निगम की खास रिपोर्ट
कमिश्नरेट पुलिस की लचर कार्यशैली के चलते दबंगों और भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। 40 वर्ष पुराने मकान पर जबरन कब्जा करने, गृहस्थी का सामान पार करने और 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई शून्य है। पुलिस के इस ढुलमुल रवैये से आहत पीड़ित बुजुर्ग ने अशोक नगर स्थित कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में प्रेसवार्ता कर न्याय की गुहार लगाई है।अनवरगंज साउथ रेलवे कालोनी निवासी बुजुर्ग रामनरेश मौर्य ने पत्रकारों को बताया कि शंख चौराहा, गोपाल नगर स्थित मकान नंबर 42-ए पर उनका पिछले 40 वर्षों से उनका मकान है। कोरोना काल के दौरान वह अपने दूसरे आवास अनवरगंज में रहने चले गए थे। इसी का फायदा उठाकर दबंग उमेश यादव, उसके भाई दीपचंद्र व अन्य अराजक तत्वों ने मकान का गेट उखाड़कर अपना ताला जड़ दिया और भीतर रखी पूरी गृहस्थी गायब कर दी।विरोध पर दी जान से मारने की धमकीपीड़ित के मुताबिक, 8 अगस्त को जब वह अपने मकान पर पहुंचे तो आरोपी उमेश यादव अपने गुर्गों के साथ आ धमका। गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर आमादा हो गया और खुलेआम धमकी दी कि यदि मकान चाहिए तो 10 लाख रुपये रंगदारी दो, वरना जान से हाथ धोना पड़ेगा। पुलिस आयुक्त से शिकायत के बाद उनके आदेश पर 20 अगस्त को थाना सेन पश्चिम पारा थाने में गंभीर धाराओं में रिपोर्ट तो दर्ज कर ली गई, लेकिन इसके बाद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठ गई।थाने का वांछित और गुंडा एक्ट का आरोपी है नामजदप्रेसवार्ता में पीड़ित ने पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि उमेश यादव शातिर अपराधी है। वह थाना सेन पश्चिम पारा में गुंडा एक्ट का आरोपी और वांछित है। वर्ष 2015 में भी पीड़ित की बेटी व दामाद पर जानलेवा हमले के मामले में बिधनू थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।पीड़ित का आरोप है कि रसूख के चलते पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है, जिससे वह खुलेआम घूमकर केस वापस लेने का दबाव बना रहा है और पूरे परिवार को जान का खतरा बना हुआ है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से भूमाफिया को तत्काल जेल भेजने और पैतृक मकान कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।





