वृंदावन में गूंजे कान्हा के जयकारे

वृंदावन में गूंजे कान्हा के जयकारे, भव्य रूप में मनाई कृष्ण जन्माष्टमी
पूज्य तुलसाराम जी महाराज के चातुर्मास प्रवास में उमड़ा राजपुरोहित समाज, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
वृंदावन। धर्म और अध्यात्म की पावन नगरी वृंदावन में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच भव्य एवं ऐतिहासिक रूप में मनाया गया। ब्रह्म सावित्री पीठ के पीठाधीश्वर परम पूजनीय श्री तुलसाराम जी महाराज के चातुर्मास प्रवास के दौरान आयोजित जन्माष्टमी समारोह में राजपुरोहित समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी समारोह में शामिल हुए। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर पूरे परिसर में विशेष सजावट की गई। जैसे ही जन्मोत्सव का शुभ अवसर आया, भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण कृष्णमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना की। जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं ने ब्रह्म सावित्री पीठ के पीठाधीश्वर श्री तुलसाराम जी महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की और प्रसाद ग्रहण किया। चातुर्मास प्रवास के दौरान गुरु सान्निध्य और कृष्ण जन्माष्टमी का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर कानसिंह राजपुरोहित ने कहा कि वृंदावन की पावन धरती पर कृष्ण जन्माष्टमी और परम पूजनीय तुलसाराम जी महाराज का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होना समाज के लिए सौभाग्य की बात है। यह अवसर हम सभी के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। समारोह में राजपुरोहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता से सराबोर आयोजन में लोगों ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। युवाओं और महिलाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम में विशेष उत्साह भर दिया। वृंदावन में आयोजित यह कृष्ण जन्माष्टमी समारोह महज धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि आस्था, संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और सामाजिक एकजुटता का सुंदर संगम बनकर सामने आया। पूज्य तुलसाराम जी महाराज के सान्निध्य ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन लंबे समय तक अविस्मरणीय स्मृति के रूप में बना रहेगा।



