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उन्नाव:- तहसील प्रशासन और भू-माफिया की मिली भगत से ईट भट्ठा मालिक की जमीन पर कब्जे का प्रयास,गंभीर आरोप,फर्जी दस्तावेजों के जरिए खतौनी,फर्म का नाम हटाने का दावा!!

उन्नाव से जिला संवाददाता अनुज तिवारी

जनपद की सदर तहसील एक बार फिर विवादों के केंद्र में है, जहां प्रशासनिक मशीनरी पर ही जमीन कब्जाने के संगठित खेल में शामिल होने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं। मेसर्स जय गणेश ब्रिक फील्ड की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में एसडीएम के अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों पर फर्जी व्यक्तियों के नाम जमीन चढ़वाकर अवैध खरीद-फरोख्त कराने का गंभीर आरोप लगाया गया है। प्रार्थिनी उमा पत्नी ओमप्रकाश, जो कि फर्म की प्रबंधक हैं, ने आरोप लगाया है कि नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी, नायब अनुपमा सिंह और लेखपाल सत्यम शुक्ला समेत कई लोग मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह कार्य कर रहे हैं। इन पर आरोप है कि असली मालिक फर्म का नाम खतौनी से हटवाकर मृतक पार्टनर रामचरन के वारिसों के नाम फर्जी तरीके से दर्ज करा दिया गया, जबकि यह पूरा मामला उपजिलाधिकारी न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रार्थना पत्र के अनुसार, क्षितिज द्विवेदी के न्यायालय में अपील (14/2/121) लंबित होने के बावजूद एसडीएम द्वारा अलग से कब्जा कराने के लिए टीम भेजी जा रही है, जो न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि तहसील सदर उन्नाव में पैमाइश और अन्य कार्य प्राइवेट लड़कों से कराए जा रहे हैं, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इन सभी कार्यों को क्षितिज द्विवेदी के संरक्षण में अंजाम दिया जा रहा है, जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर संदेह गहराता जा रहा है। मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब आरोप लगाया गया कि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया—जैसे हदबंदी, धारा 24 या 134 के तहत बेदखली—के, तहसील प्रशासन पुलिस बल के साथ जमीन पर कब्जा कराने पहुंच गया।

प्रार्थना पत्र के अनुसार, कई दिनों से लगातार दबाव बनाकर पैमाइश और कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं, जिसका वीडियो साक्ष्य भी मौजूद बताया गया है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि नायब तहसीलदार स्वयं जेसीबी, ट्राली, सीमेंट के खंभे और कांटेदार तार लेकर मौके पर पहुंचे, जिससे जबरन कब्जे की तैयारी स्पष्ट होती है। प्रार्थिनी का दावा है कि अधिकारियों ने खुलेआम कहा कि जैसे फर्म का नाम रिकॉर्ड से हटवाया गया है, वैसे ही जमीन पर कब्जा कर उसे बेच दिया जाएगा और उसमें हिस्सा लिया जाएगा। प्रार्थिनी ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान-माल की धमकियां दी जा रही हैं। यहां तक कि अधिकारियों द्वारा अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए महिला होने का फायदा उठाकर डराने-धमकाने की कोशिश की गई।

इतना ही नहीं, 30 जनवरी 2026 को एक कथित अवैध आदेश के जरिए फिर से वारिसों के नाम दर्ज कर दिए गए, जबकि अपील पहले से लंबित थी। आरोप है कि इस आदेश पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए, जो पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बनाता है। पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही फर्म की संपत्ति की सुरक्षा और परिवार की जान-माल की रक्षा की भी गुहार लगाई गई है। अब सवाल यह उठता है कि क्या उन्नाव में प्रशासन खुद ही कानून को ठेंगा दिखाकर जमीनों का खेल खेल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर संगठित तरीके से कब्जा कराने में लगे हैं? जनता की नजरें अब जिलाधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

Anuj Tiwari

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