पीयर लर्निंग से बच्चों में बढ़ रहा आत्मविश्वास, सहयोग और सीखने का उत्साह


वाराणसी के चोलापुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चुमुकनी में खंड शिक्षा अधिकारी नागेंद्र सरोज के मार्गदर्शन में निपुण चैंपियंस के साथ पीयर लर्निंग के अनुभवों को लेकर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के बीच समूह में सीखने की प्रक्रिया, उसके प्रभाव और उनके अनुभवों को समझना रहा।
कार्यक्रम में विद्यालय के 14 निपुण चैंपियंस ने सहभागिता की। इनमें से पांच बच्चों से विशेष रूप से बातचीत कर पीयर लर्निंग के दौरान साथियों के साथ सीखने के अनुभवों के बारे में जानकारी ली गई। बच्चों ने उत्साहपूर्वक बताया कि साथियों के साथ मिलकर पढ़ाई करने से उन्हें सीखने में खुशी मिलती है और कठिन विषय भी आसानी से समझ में आते हैं।निपुण चैंपियंस ने बताया कि पीयर लर्निंग की कक्षा में वे एक-दूसरे की मदद करते हुए संख्या ज्ञान, गिनती, जोड़, घटाव, हिंदी वर्णमाला, शब्द एवं वाक्य निर्माण जैसे विषयों का अभ्यास करते हैं। बच्चे अपने सीखे हुए ज्ञान और विचारों को साथियों के साथ साझा करते हैं, जिससे उन्हें अपनी समझ को और बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।

बच्चों के अनुसार, समूह में पढ़ाई करने से कक्षा का वातावरण अधिक रोचक और आनंददायक बनता है। साथियों से चर्चा करने और एक-दूसरे की गलतियों को सुधारने से उनमें विषय को समझने के साथ-साथ बोलने और अपनी बात रखने का आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री दुर्गेश चौबे ने बताया कि संवाद के दौरान पीयर लर्निंग शिक्षिका सुलेखा पांडेय एवं संध्या शर्मा उपस्थित रहीं। बच्चों के अनुभवों को जानने और पीयर लर्निंग की प्रभावशीलता को समझने के लिए इन्वॉल्व फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड अनुभव चौधरी ने बच्चों से संवाद किया।
खंड शिक्षा अधिकारी श्री नागेंद्र सरोज ने कहा कि विद्यालय में शिक्षक के सहयोग से पीयर लर्निंग की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका लाभ बच्चों को केवल विषयगत ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उनमें आत्मविश्वास, सहयोग, संवाद कौशल और एक-दूसरे से सीखने की भावना भी मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना निपुण लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पीयर लर्निंग के माध्यम से बच्चे स्वयं सीखने के साथ अपने साथियों को भी सीखने में सहयोग देते हैं, जिससे विद्यालय में सहयोगात्मक और आनंदपूर्ण शिक्षण का वातावरण तैयार हो रहा है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के अनुभवों और उनकी सहज अभिव्यक्ति ने यह स्पष्ट किया कि पीयर लर्निंग उनके लिए पढ़ाई को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने का माध्यम बन रही है।




