जहां हर रोज लोगों को मिलती है अंतिम विदाई, वहीं अंतिम संस्कार कराने वाले कर्मचारियों को दो-दो महीने से नहीं मिला वेतन

बैकुंठ धाम के कर्मचारियों की पीड़ा—काम करने वालों की तनख्वाह अटकी, आरोप है कि काम पर नहीं आने वालों के खातों में पहुंच रहा पैसा; ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल
लखनऊ।जिस बैकुंठ धाम में हर दिन परिवार अपनों को अंतिम विदाई देने पहुंचते हैं, उसी स्थान पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई के लिए परेशान बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले दो महीने से कई लोगों को वेतन नहीं मिला, जबकि वे लगातार ड्यूटी कर रहे हैं।

मामला लखनऊ के भैंसाकुंड स्थित बैकुंठ धाम का है। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार की ओर से वेतन भुगतान में मनमानी की जा रही है। उनका कहना है कि काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह रुकी हुई है, जबकि कुछ ऐसे लोगों के खातों में भुगतान होने की शिकायत है जो नियमित रूप से काम पर नहीं आते।
🔴 अर्पित को जून-जुलाई का वेतन नहीं मिलने का दावा

कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक अर्पित कुमार सिंह पुत्र अजय सिंह चौहान को जून और जुलाई का वेतन नहीं मिला है। दीपक कुमार पुत्र सुरेन्द्र कुमार और राकेश सिंह पुत्र शीतला सिंह समेत अन्य कर्मचारियों की ओर से भी वेतन भुगतान में देरी की शिकायत सामने आई है।
कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन नहीं मिलने से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।


🔴 काम कोई कर रहा, वेतन किसी और के खाते में?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि वास्तविक रूप से ड्यूटी करने वाले कुछ कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा, जबकि कथित तौर पर गैरहाजिर रहने वाले लोगों के खातों में भुगतान किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि नगर निगम उपस्थिति रजिस्टर, संस्था द्वारा प्रस्तुत वेतन बिल और बैंक खातों में हुए भुगतान का मिलान कराए। इससे साफ हो सकेगा कि किस कर्मचारी ने वास्तव में काम किया और भुगतान किसे हुआ।


🔴 कोविड में यही कर्मचारी रात-दिन करते रहे काम
कोविड महामारी के दौरान बैकुंठ धाम और अन्य श्मशान घाटों पर भारी दबाव था। मीडिया रिपोर्टों में उस समय बैकुंठ धाम के कर्मचारियों द्वारा कई-कई घंटे लगातार ड्यूटी करने और बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार कराने का उल्लेख सामने आया था।
कर्मचारियों का कहना है कि कठिन दौर में लगातार सेवा देने वाले लोगों को आज अपनी तनख्वाह के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

🔴 ग्रीन हरित शवगृह की व्यवस्था पर भी सवाल
बैकुंठ धाम में नगर निगम की ओर से ग्रीन हरित शवगृह की व्यवस्था भी संचालित की जा रही है। कर्मचारियों का दावा है कि इस व्यवस्था से जुड़े कर्मियों का वेतन नियमित निकल रहा है, जबकि प्रत्यक्ष रूप से अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों का भुगतान लंबित है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कर्मचारियों की मांग है कि नगर निगम यह स्पष्ट करे कि ग्रीन हरित अंतिम संस्कार व्यवस्था में कितने कर्मचारी तैनात हैं, कितने अंतिम संस्कार हुए और वेतन मद में कितना भुगतान किया गया।

🔴 सवाल ठेकेदार से भी, नगर निगम से भी
कर्मचारियों का सवाल है कि यदि नगर निगम संस्था को कर्मचारी मद में भुगतान कर चुका है तो कर्मचारियों तक पैसा क्यों नहीं पहुंचा। और यदि उपस्थिति में गड़बड़ी कर किसी गैरहाजिर व्यक्ति को वेतन दिया जा रहा है तो उसका सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।

🔴 नगर आयुक्त से जांच और भुगतान की मांग
कर्मचारियों ने नगर आयुक्त से मांग की है कि बैकुंठ धाम में तैनात कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति, जून-जुलाई-अगस्त के वेतन बिल, बैंक ट्रांसफर और ठेकेदार को किए गए भुगतान की जांच कराई जाए।
जिन कर्मचारियों ने काम किया है उनका लंबित वेतन तत्काल जारी कराया जाए और यदि भुगतान अथवा उपस्थिति में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित संस्था की जवाबदेही तय की जाए।
जिस जगह पर कर्मचारी हर दिन किसी परिवार के सबसे कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं उन्हें अपनी तनख्वाह के लिए महीनों इंतजार करना पड़े—यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
इस पूरे मामले में संबंधित ठेकेदार और नगर निगम का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


