गणेशगंज में टैक्स नोटिस पर फूटा व्यापारियों का गुस्सा, तीन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

महापौर सुषमा खर्कवाल को देंगे शिकायत; ओम प्रकाश सिंह, अनुराग उपाध्याय और देवी शंकर दुबे की भूमिका की जांच की मांग
लखनऊ।नगर निगम जोन-1 में संपत्ति कर के नोटिसों को लेकर गणेशगंज के व्यापारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। गणेशगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह और वरिष्ठ महामंत्री बलराम मौर्य की ओर से महापौर सुषमा खर्कवाल को शिकायती पत्र सौंपने की तैयारी की गई है। पत्र में प्रभारी जोनल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह, कर अधीक्षक अनुराग उपाध्याय और राजस्व निरीक्षक द्वितीय श्रेणी देवी शंकर दुबे की कार्यप्रणाली की वरिष्ठ स्तर से जांच कराने की मांग की गई है।

व्यापारियों का आरोप है कि क्षेत्र में संपत्ति कर के पुनर्निर्धारण को लेकर ऐसे नोटिस दिए जा रहे हैं जिनकी अवधि और राशि को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में पुराने वर्षों से टैक्स का पुनर्निर्धारण कर भारी रकम के नोटिस थमाए जा रहे हैं, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं।

नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर हाउस टैक्स, सेल्फ असेसमेंट, आपत्ति और संपत्ति कर संबंधी नियमों की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में व्यापारियों की मुख्य मांग है कि उनके मामलों में भी कर निर्धारण स्पष्ट नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही किया जाए।

🔴 नोटिस बांट कौन रहा? पहचान पर भी सवाल
शिकायत का सबसे गंभीर पहलू नोटिस वितरण की प्रक्रिया को लेकर है। व्यापारियों का आरोप है कि कुछ नोटिस ऐसे व्यक्तियों के माध्यम से दुकानों तक पहुंचाए गए जिनकी नगर निगम में अधिकृत हैसियत उन्हें स्पष्ट नहीं बताई गई।

व्यापारियों का सवाल है कि जब टैक्स नोटिस एक महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज है, तो उसे देने वाले व्यक्ति के पास नगर निगम का पहचान पत्र और अधिकृत आदेश क्यों न हो? व्यापार मंडल ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि नोटिस किसके निर्देश पर और किन लोगों से वितरित कराए गए।
🔴 ‘सेटलमेंट’ की पर्चियों का आरोप, जांच की मांग
व्यापार मंडल की शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ दुकानदारों तक कथित रूप से टैक्स के मामलों में “सेटलमेंट” से जुड़े संदेश अथवा पर्चियां पहुंची हैं। व्यापारी नेताओं का कहना है कि कई दुकानदार भय और संकोच के कारण खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।

इसी बिंदु पर तीनों अधिकारियों की प्रशासनिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। व्यापारियों की मांग है कि यह जांच की जाए कि नोटिस तैयार करने, स्वीकृत करने, वितरित कराने और उसके बाद होने वाली बातचीत की पूरी प्रशासनिक श्रृंखला में किस अधिकारी की क्या भूमिका रही। हालांकि व्यापारियों के आरोपों से किसी अवैध वसूली या मिलीभगत का तथ्य स्वतः सिद्ध नहीं होता; इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

🔴 जलकर ने बढ़ाई परेशानी

संपत्ति कर के साथ ही व्यापारियों ने जलकर के बिलों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई प्रतिष्ठानों में जल कनेक्शन नहीं होने के बावजूद बिल प्राप्त हो रहे हैं। मांग है कि प्रत्येक मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि किस नियम के तहत जलकर लगाया गया है।
🔴 पार्षद गिरीश गुप्ता भी व्यापारियों के साथ
क्षेत्रीय पार्षद गिरीश गुप्ता ने व्यापारियों की शिकायत को गंभीर बताते हुए कहा कि महापौर से मुलाकात के लिए समय लिया गया है और व्यापारी अपनी पूरी शिकायत उनके सामने रखेंगे। पार्षद भी व्यापारियों के साथ मौजूद रहेंगे।

व्यापारियों का कहना है कि उनका विरोध टैक्स देने के खिलाफ नहीं है, बल्कि मनमाने निर्धारण, नोटिस वितरण की कथित अनियमित प्रक्रिया और कथित सेटलमेंट संदेशों के खिलाफ है।
अब नजर महापौर सुषमा खर्कवाल के स्तर से होने वाली कार्रवाई पर है। नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर महापौर की ओर से भुगतान और अतिरिक्त पैसे की मांग जैसी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था का भी उल्लेख है, जिससे पारदर्शिता पर नगर निगम के घोषित जोर का संकेत मिलता है।

व्यापारियों की मांग साफ है—नोटिसों की जांच हो, अधिकृत कर्मचारियों से ही नोटिस बंटें, कथित सेटलमेंट प्रकरण की गोपनीय जांच कराई जाए और विवादित मामलों के निस्तारण तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकी जाए।




