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बरेली: UCC शरियत में मुदाखलत, इसलिए मुसलमानों को मंजूर नहीं: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

अमित शाह के बयान के बाद बोले ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कहा- विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में करें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर दिए गए हालिया बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा था कि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के 21 राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।

इसी बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रेस को जारी बयान में UCC को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरियत के मामलों में हस्तक्षेप करती है, इसलिए मुस्लिम समुदाय इसे स्वीकार नहीं करता।

मौलाना बोले- अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियां अलग

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में कहा कि समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर संविधान में प्रावधान है। उन्होंने दावा किया कि जिस राज्य में ऐसा कानून लागू किया जाएगा, वहां रहने वाले अलग-अलग समुदायों की राय को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हालांकि, संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।

मौलाना ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सामाजिक परिस्थितियां, समुदायों की संरचना और स्थानीय समस्याएं अलग हैं। ऐसे में किसी एक राज्य के मॉडल को सभी राज्यों पर लागू करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि UCC के मसौदे को तैयार करते समय संबंधित राज्यों और वहां रहने वाले विभिन्न समुदायों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

नॉर्थ ईस्ट के जनजातीय कानूनों का दिया हवाला

मौलाना ने कहा कि भारत में विभिन्न समुदायों और जनजातीय समूहों को संविधान के तहत अलग-अलग अधिकार और संरक्षण प्राप्त हैं। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागालैंड, मिजोरम और अन्य राज्यों में कई समुदाय लंबे समय से अपनी परंपराओं और स्थानीय कानून व्यवस्था के अनुसार जीवन जीते आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि UCC लागू करने की प्रक्रिया में इन समुदायों के संवैधानिक संरक्षण और स्थानीय व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। मौलाना ने कहा कि किसी भी समुदाय की स्थापित व्यवस्था में बदलाव करने से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

धार्मिक आजादी प्रभावित न होने देने की मांग

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि संविधान देश के नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उनका कहना है कि यदि समान नागरिक संहिता के जरिए किसी समुदाय की धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत कानूनों पर प्रभाव पड़ता है, तो इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय का एक वर्ग UCC को शरियत में हस्तक्षेप के रूप में देखता है और इसी कारण इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने सरकार से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ी चिंताओं पर विचार करने की मांग की।

विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने की अपील

मौलाना ने देशभर के मुस्लिम संगठनों से UCC के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की हिंसा या उपद्रव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था का ध्यान रखा जाए और किसी भी तरह का उकसावे वाला कदम न उठाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी कार्यक्रम अमन और शांति के साथ तथा कानून के दायरे में रहकर किए जाने चाहिए।

Sanjay Srivastva
Sanjay Srivastva (Special Correspondent)

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