लखनऊ में गंदा पानी संकट: जोन-2 जलकल पर लापरवाही के आरोप | Lucknow News

नल से पानी नहीं, बदबू और बीमारी—लखनऊ के जोन-2 जलकल की लापरवाही पर उठे सवाल
मनीष मिश्रा | सूचना इंडिया | लखनऊ
लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि नलों से साफ पानी की जगह बदबूदार और गंदा तरल निकल रहा है। रामनगर, एलडीए कॉलोनी (MMIG-302) निवासी विनय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यह समस्या पिछले एक साल से अधिक समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसे गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हैं।
एक साल से दूषित पानी, शिकायतें बेअसर
पीड़ित परिवार के अनुसार, इस संबंध में जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियर को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं। हर बार सिर्फ यही जवाब मिला—
“लाइन चेक करा देंगे।”
लेकिन आज तक जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतें केवल फाइलों तक सीमित रह गई हैं, जबकि इलाके में दूषित जल आपूर्ति लगातार जारी है।
गंदे पानी से बीमारी का खतरा, परिवार दहशत में
विनय कुमार श्रीवास्तव का आरोप है कि गंदे और बदबूदार पानी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। उनका कहना है कि इसी दूषित पानी के सेवन से उनकी बड़ी बहन गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं।
पड़ोस के अन्य घरों में भी यही समस्या सामने आ रही है, जिससे पूरे मोहल्ले में डर और नाराज़गी का माहौल है।

महाप्रबंधक का कार्यालय पास, फिर भी नहीं सुनवाई
विडंबना यह है कि यह इलाका ऐशबाग में ही स्थित है, जहां लखनऊ जलकल के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह का कार्यालय मौजूद है।
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शीर्ष अधिकारी का दफ्तर पास में है, तो फिर जोन-2 जलकल की लापरवाही क्यों थम नहीं रही?
लोगों का कहना है कि यह मामला केवल तकनीकी खराबी का नहीं, बल्कि जवाबदेही की कमी का भी है।
समाधान नहीं हुआ तो सोशल मीडिया से मुख्यमंत्री तक शिकायत
पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे अपनी शिकायत को सोशल मीडिया (ट्विटर/X) के माध्यम से उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे।
स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि अब खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल और ठोस कार्रवाई चाहिए।
जनता का भरोसा कमजोर कर रही जलकल की कार्यप्रणाली
लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान न होना जलकल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का भरोसा सिस्टम से और भी कमजोर हो जाएगा।




