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जल ही जीवन है, पर लखनऊ जलकल विभाग की नज़र में नहीं!

सड़क पर बहता साफ पानी और घरों में सूखी टोटियाँ

लखनऊ। एक ओर पानी के लिए तरसते लोग, दूसरी ओर सड़कों पर बेहिसाब बहता साफ पानी। यह नज़ारा है लखनऊ जलकल विभाग जोन-7 का, जहां ‘जल ही जीवन है’ का नारा सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है।

भूतनाथ मार्केट: जहां सड़कें बनीं झील

भूतनाथ मार्केट में जलकल विभाग की कृपा से सड़कें मिनी नदियों में तब्दील हो चुकी हैं। साफ पानी सड़कों पर यूँ बह रहा है, मानो विभाग को यह यकीन हो गया हो कि सड़क पर नहरें बनाकर शहर को वेनिस बना दिया जाएगा! कोई ध्यान देने वाला नहीं, कोई पूछने वाला नहीं।

विक्रमादित्य वार्ड: बूंद-बूंद साफ पानी को तरसते लोग

दूसरी ओर विक्रमादित्य वार्ड के लोग गंदे पानी की टोटियाँ देखकर जलकल विभाग को कोस रहे हैं। यहाँ के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन विभाग कानों में तेल (या शायद गंदा पानी) डालकर बैठा है।

महाप्रबंधक: शासन की मीटिंगों के बाहर जनता के फोन बंद

महाप्रबंधक कुलदीप सिंह महोदय जनता की शिकायतें सुनने की बजाय ‘शासन की मीटिंग’ में व्यस्त रहने का बहाना बना रहे हैं। फोन करना व्यर्थ है, क्योंकि जवाब सिर्फ वही घिसा-पिटा मिलेगा—”शासन की मीटिंग में हैं!” लगता है, इनकी मीटिंगें कभी खत्म ही नहीं होतीं।

अधिशासी अभियंता: जोन 4 का प्रभार, जोन 7 का सत्यानाश

जोन-7 के प्रभारी अधिशासी अभियंता के पास जोन-4 का भी प्रभार है, तो ज़ाहिर है कि जोन-7 को उनकी नज़रों में तवज्जो मिल ही नहीं रही। पंपसेट ऑपरेटर फ़ाइलें बनाने में इतने व्यस्त हैं कि पानी की बर्बादी या गंदे पानी की आपूर्ति पर ध्यान देना उनकी प्राथमिकता में ही नहीं आता।

जलकल विभाग: अव्यवस्था की नई मिसाल!

पानी जो घरों में आना चाहिए, वह सड़कों पर बह रहा है। गंदा पानी जो नालों में जाना चाहिए, वह पाइपलाइनों से घरों में पहुंच रहा है। लेकिन विभाग इस हालात पर चुप है, क्योंकि अधिकारियों के घरों में पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जनता चाहे गंदा पानी पिए या सूखी टोटी निहारे, इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता।

समाधान कब? या फिर ‘शासन की मीटिंग’ ही चलेगी?

अब सवाल यह है कि क्या जलकल विभाग इस समस्या का कोई हल निकालेगा, या फिर ‘शासन की मीटिंग’ और ‘फाइलों में उलझे अभियंता’ इसी तरह जनता को मूर्ख बनाते रहेंगे? जब तक पानी की कीमत आम जनता के बजाए अधिकारियों के लिए मायने नहीं रखती, तब तक लखनऊ में जल ही जीवन नहीं, बल्कि जल ही समस्या बना रहेगा!

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सूचना इंडिया न्यूज़ चैनल के अनुभवी पत्रकारों और लेखकों की पूरी टीम काम कर रही हैं, सूचना इंडिया के एडिटोरियल टीम के पास 15 वर्षों का गहन अनुभव है। राजनीति, सामाजिक मुद्दों, और अर्थव्यवस्था पर उनकी रिपोर्ट्स और लेखन शैली ने उन्हें मीडिया जगत में विशेष पहचान दिलाई है। सूचना इंडिया ने विगत 15 वर्षों में कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स का नेतृत्व किया है और पत्रकारिता में निष्पक्षता और नैतिकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक विश्वसनीय आवाज बनाया है। उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं और युवा पत्रकारों को मार्गदर्शन देने में भी सक्रिय हैं।

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