नीता खन्ना का अनूठा अंदाज: 25 दिसंबर को तीन ऐतिहासिक घटनाओं का संगम | Veer Bal Diwas 2024
Veer Bal Diwas 2024: Honoring the Sacrifice of Guru Gobind Singh Ji's Four Sons
क्रिसमस या बड़ा दिन, ईसा मसीह या यीशु जन्म दिवस
सरोजनी नगर की प्रशिद्ध समाज सेविका नीता खन्ना जिन्हे सभी प्यार से दीदी कहते हैं ने इस बार 25 दिसंबर को कुछ अलग अंदाज़ में मनाया, जैसा की 25 दिसंबर को पूरी दुनिया क्रिसमस यीशु मसीह के जन्म दिवस के रूप में मनाती आ रही है, भारत वर्ष में भी ऐसा कोई शहर नहीं है जहाँ पर यीशु मसीह के जन्म दिवस को क्रिसमस के रूप में न मनाया जाता हो, जगह जगह छोटे बड़े सभी चर्च और बाज़ार सजे हुए हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी जन्म दिवस
भारत वर्ष में 25 दिसंबर को भारत के 10वें प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेई के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया गया, इस अवसर पर जगह जगह तरह तरह के कार्यक्रम आयोजित किये गए लखनऊ में जो अटल जी की कर्मभूमि रही है अटल गीत संध्या और स्वास्थ्य मेले का भव्य आयोजन किया गया जिसमें लाखों लोगों ने सम्मलित होकर आयोजन को सफल बनाया वही पर समाज सेविका नीता खन्ना ने 25 दिसंबर को सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों – बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह – के अद्वितीय बलिदान को याद करते हुए Veer Bal Diwas 2024 के रूप में बंगलुरु और लखनऊ में एक साथ मनाया।
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वीर बाल दिवस
नीता खन्ना जी वर्तमान में स्वास्थ्य सम्बंधित कुछ समस्याओं के वजह से बंगलुरु में हैं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ कर सेक्टर D1 विद्यावती वार्ड-2, LDA कॉलोनी चैतन्य पार्क में तथा शोभा अवेनुए सोसाइटी बंगलुरु में कॉलोनी के सभ्रांत लोगो को साथ लेकर और जागरूक करते हुए Veer Baal Diwas (वीर बाल दिवस) को श्रद्धा और आदर के साथ मनाया।




लखनऊ में जहाँ अजित सिंह, त्रिलोक सिंह बेहाल, राजिंदर पाहवा,D P S बग्गा, अविनाश कौर,लता लछ्वानी, नीलू पाहवा, रिम्पी, मीनू, रागी, चरणजीत सिंह, शिखा, शिल्पी खन्ना, शिल्पी सोमानी आदि लोगो ने कार्यक्रम को सफल बनाया वहीँ बंगलुरु में समाजसेवी नीता खन्ना जी का साथ सुभद्रा, मीरा,अनु, कुसुम खन्ना, उषा सिंधवानी, सुमन वर्मा ने उन वीर बालकों को श्रद्धांजलि अर्पित किया जिन्होंने धर्म, संस्कृति और अपने कर्तव्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
यह दिन हमें अपने पूर्वजों की वीरता और साहस को याद दिलाता है और यह सिखाता है कि सच्चे धर्म और मानवता की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करना चाहिए। गुरु गोबिंद सिंह जी के साहसी पुत्रों ने मुगलों के अत्याचार का डटकर सामना किया और अपने धर्म और आदर्शों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दे दी।
क्या है ऐतिहासिक घटना
1705 ईस्वी में, जब गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार को मुगलों ने निशाना बनाया, तब उनके चारों पुत्रों को बंदी बना लिया गया। दो छोटे साहिबजादे, बाबा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और बाबा फतेह सिंह (7 वर्ष), को इस्लाम कबूल करने का दबाव डाला गया। जब उन्होंने इसे ठुकरा दिया, तो उन्हें दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया। बड़े साहिबजादे, बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह, ने चामकौर के युद्ध में अद्भुत वीरता दिखाई और वीरगति को प्राप्त हुए।
आज की पीढ़ी को नीता खन्ना का सन्देश
Veer Bal Diwas 2024 हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और आदर्शों पर अडिग रहना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी को इन शहीदों से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने जीवन में साहस, त्याग और निष्ठा जैसे गुणों को अपनाना चाहिए। माता पिता और बड़े बुजुर्गों को अपने बच्चों को इतिहास की इन गौरवशाली कहानियों से अवगत कराना चाहिए, परिवार के साथ मिलकर भजन, कीर्तन, और धर्म ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। बच्चों को साहिबजादों के बलिदान की गाथा सुनाकर उन्हें धर्म, सत्य और मानवता के महत्व का एहसास कराना चाहिए।
हमारा इतिहास हमें न केवल हमारे मूल्यों की याद दिलाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सही मार्गदर्शन भी देता है। पूर्वजों की शौर्य गाथा हमें यह सिखाती है कि अपने धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा कैसे की जाती है। इसे याद रखना और नई पीढ़ी को सिखाना हमारी जिम्मेदारी है ताकि वे अपने देश, धर्म और समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठ बन सकें।




