KGMU में चमत्कारिक सर्जरी: बच्चे के दिमाग से निकली वांडरिंग बुलेट | Lucknow News

केजीएमयू में चमत्कारिक सर्जरी: 3 साल के बच्चे के मस्तिष्क से निकाली गई दुर्लभ वांडरिंग बुलेट
मनीष मिश्रा | लखनऊ
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केजीएमयू के न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों ने तीन वर्षीय बच्चे के मस्तिष्क से एक दुर्लभ माइग्रेटरी (Wandering) इंट्राक्रेनियल बुलेट को सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचाई। सर्जरी के बाद बच्चे की न्यूरोलॉजिकल स्थिति में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया है।
गोली सिर में लगने के बाद लगातार बदल रही थी स्थान
जानकारी के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 को मासूम बच्चे के सिर के बाएं फ्रंटल बोन में गोली लगने की चोट आई थी। शुरुआती CT Scan में गोली फ्रंटल लोब में पाई गई थी।
हालांकि, केजीएमयू में भर्ती होने के बाद की गई क्रमिक जांचों (Serial Imaging) में यह सामने आया कि गोली अपनी जगह पर स्थिर नहीं थी, बल्कि धीरे-धीरे बेसल क्षेत्र से होते हुए ऑक्सिपिटल क्षेत्र तक खिसक गई।

डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की वांडरिंग बुलेट बेहद दुर्लभ होती है और इससे मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।
भर्ती के समय बच्चे की स्थिति चिंताजनक
अस्पताल में भर्ती के समय बच्चा सुस्त अवस्था (Drowsy Condition) में था और उसके शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी देखी गई।
गोली के लगातार स्थान बदलने और संभावित vascular injury के खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल सर्जरी करने का फैसला लिया।
अत्यंत जटिल न्यूरोसर्जरी को दिया गया अंजाम
यह चुनौतीपूर्ण न्यूरोसर्जरी डॉ. अंकुर बजाज द्वारा की गई। उनके साथ इस सर्जरी में
डॉ. अनुप के. सिंह, डॉ. अंकन बसु और डॉ. श्रद्धा की विशेषज्ञ टीम शामिल रही।
पूरी प्रक्रिया न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. बी. के. ओझा के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

ऑपरेशन के दौरान इंट्राऑपरेटिव फ्लोरोस्कोपी तकनीक की मदद ली गई, जिससे गोली की सटीक स्थिति का पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा सका।
एनेस्थीसिया और पीडियाट्रिक ICU में बेहतर देखभाल
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया प्रबंधन की जिम्मेदारी
डॉ. मोनिका कोहली और डॉ. नीलकमल ने संभाली।
ऑपरेशन के बाद बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में शिफ्ट किया गया, जहां
प्रो. एस. एन. सिंह, डॉ. शालिनी त्रिपाठी और डॉ. स्मृति जैन के नेतृत्व में बच्चे की लगातार निगरानी और देखभाल की गई।
कुलपति ने दी पूरी मेडिकल टीम को बधाई
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस सफल और जटिल सर्जरी पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केजीएमयू की उन्नत चिकित्सा क्षमताओं और डॉक्टरों की विशेषज्ञता को दर्शाती है।
चिकित्सा क्षेत्र में केजीएमयू की बड़ी उपलब्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की Wandering Bullet Brain Surgery न केवल तकनीकी रूप से कठिन होती है, बल्कि इसमें समय पर निर्णय और अत्याधुनिक तकनीक का सही उपयोग बेहद जरूरी होता है।
केजीएमयू के डॉक्टरों की यह सफलता न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।



