बॉम्बे हाईकोर्ट में हाई प्रोफाइल केस! लीलावती ट्रस्ट विवाद में HDFCBank CEO के खिलाफ FIR पर घमासान
लीलावती ट्रस्ट विवाद में HDFCBank CEO घिरे, बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई से हटे कई जज | FIR पर घमासान

“बॉम्बे हाईकोर्ट में हंगामा! लीलावती ट्रस्ट केस में HDFCBank सीईओ पर कानूनी शिकंजा”
मुंबई। देश के प्रतिष्ठित HDFCBank के CEO शशिधर जगदीशन और मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल ट्रस्ट के बीच चल रहा कानूनी विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। इस हाई प्रोफाइल केस में मानहानि की FIR दर्ज होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई से एक के बाद एक कई जजों ने खुद को अलग कर लिया है। इससे यह केस अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
क्या है लीलावती हॉस्पिटल ट्रस्ट विवाद?
मुंबई स्थित लीलावती हॉस्पिटल, देश के सबसे प्रतिष्ठित चैरिटेबल ट्रस्टों में से एक है। यह ट्रस्ट कई दशकों से एक ही परिवार के नियंत्रण में है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसके ट्रस्टी और परिवारजनों के बीच आपसी मतभेद और पारिवारिक झगड़े लगातार सुर्खियों में रहे हैं।
इन्हीं विवादों के बीच, ट्रस्ट से जुड़े एक मामले में HDFCBank के MD और CEO शशिधर जगदीशन का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने कुछ ट्रस्टियों के खिलाफ झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए, जिसके चलते उनके खिलाफ मानहानि और साजिश से जुड़ी FIR दर्ज की गई।
HDFCBank CEO ने की FIR रद्द करने की मांग
शशिधर जगदीशन ने इस FIR को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट से FIR को रद्द करने की अपील की है, जिसमें उनका कहना है कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें बिना साक्ष्य के निशाना बनाया गया है।
कोर्ट में सुनवाई से पीछे हटे कई जज
इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जब याचिका की सुनवाई होनी थी, तब तीन जजों ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। उन्होंने इस फैसले का कोई कारण नहीं बताया, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसा तब होता है जब किसी जज का किसी पक्ष से व्यक्तिगत या पेशेवर जुड़ाव हो।
रिपोर्ट्स के अनुसार, छह अन्य जज भी इस केस की सुनवाई से बचते दिखे, जिससे कोर्ट के लिए उपयुक्त पीठ बनाना एक नई चुनौती बन गया है।
HDFCBank पर क्यों बनी है इतनी चर्चा?
भारत के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक होने के नाते, HDFCBank का नाम इस विवाद से जुड़ना खुद में बड़ी खबर बन गया है। बैंक की ओर से कहा गया है कि यह शशिधर जगदीशन का व्यक्तिगत मामला है और इसका बैंक के ऑपरेशंस से कोई संबंध नहीं है।
लेकिन, जब किसी शीर्ष बैंक अधिकारी के खिलाफ पुलिस केस और कोर्ट केस हो, तो यह मामला जनता और मीडिया की निगरानी में आ जाता है।
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लीगल एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के ट्रस्ट विवादों में अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रिया चलती है और कई बार आपसी समझौता भी होता है। लेकिन जब मामले में शामिल हों देश के बड़े बैंक, प्रतिष्ठित हॉस्पिटल ट्रस्ट और हाई प्रोफाइल व्यक्ति, तो ये विवाद अत्यधिक संवेदनशील बन जाते हैं।
अब अगला सवाल – कौन सुनेगा केस?
बॉम्बे हाईकोर्ट में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर किस बेंच के सामने यह याचिका पेश की जाएगी और क्या कोर्ट FIR को रद्द करने पर विचार करेगा। फिलहाल, ट्रस्ट की अंदरूनी राजनीति, पुलिस कार्रवाई और कानूनी लड़ाई – तीनों ही मोर्चों पर यह मामला तुल पकड़ता जा रहा है।
- लीलावती हॉस्पिटल ट्रस्ट विवाद अब कानूनी और सार्वजनिक दोनों मोर्चों पर गरमा चुका है।
- HDFCBank के CEO पर FIR और बॉम्बे हाईकोर्ट के जजों का हटना इसे और जटिल बना रहा है।
- यह केस न केवल बैंकिंग क्षेत्र बल्कि भारत की न्यायिक व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर परीक्षण बन गया है।



