जीएलए विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी नेे मेधावियों को मेडल देकर किया सम्मानित

मथुरा।जीएलए विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी नेे विभिन्न पाठ्यक्रमों के मेधावियों को सम्मानित किया तथा मेडल दिये।जिसमें 22 गोल्ड मेडल, 22 सिल्वर मेडल और 3136 उपाधियां दीं। पीएचडी के 47, बीएससी ऑनर्स बायोटेक के 42, बीएससी ऑनर्स कैमिस्ट्री के 27, बीएससी ऑनर्स फिजिक्स के 16, बीए ऑनर्स इकोनॉमिक्स के 13, बीबीए के 174, बीबीए ऑनर्स 114, बीबीए फैमिली बिजनेस 38, बीकॉम ऑनर्स ग्लोबल एकाउंटिंग 18, बीकॉम ऑनर्स 88, बीटेक सिविल इंजीनियरिंग 56, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 62, इलेक्ट्रॉनिक्स 2, मैकेनिकल इंजीनियरिंग 129, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग 103, कम्प्यूटर साइंस के 765, बीटेक सीएस सीसीवी 35, बीटेक सीएस डीए 37, एलएलएम सीडीपीएल के 5 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई।कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशल एवं उद्यमिता विकास केन्द्र का उदघाटन किया और अवलोकन कर केन्द्र के विषय में जानकारी ली।
जीएलए विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रजभूमि की जब मैने बात की तो एकाएक हम सबका ध्यान आज से 5 हजार वर्ष पूर्व इस दिव्य घटना के साथ होता है, जब लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इस धरा पर हुआ होगा।जन्म और उनके जीवन की बचपन की लीलाओं का आज भी इतनी प्राचीन विरासत को लेकर हम सब चल रहे हैं,उस समय साधन नहीं रहे होंगे, लेकिन मुझे एक बात अक्सर याद आती है जब मैं प्रख्यात समाजवादी चिंतक डाॅ राम मनोहर लोहिया की रचनाओं को देखता हॅू। डाॅ राम मनोहर लोहिया एक समाजवादी चिंतक थे,हो सकता है उनका मन्दिरों में जाना न रहा हो,लेकिन जब उनसे एक बार पूछा गया कि भारत की एकता,इसके एकात्मक एवं अखण्डता के आधार बिन्दु क्या हैं। उन्होंने इस पर विस्तार से लिखा भी है, तो उन्होंने कहा कि देखिये दुनिया के अन्दर तमाम देश बने हैं-बिगड़े हैं, परम्परायें आई हैं-समाप्त हुई हैं, लेकिन अगर भारत भारत बना हुआ है, इसके पीछे 3 महापुरूषों का सर्वाधिक योगदान है। यह तीन हैं राम, कृष्ण और शिव।
सुदूर अरूणांचल में आप जायेंगे, तो अरूणांचल में आज भी रूकमणी की कथा लोगों के मन में उसी प्रकार से रसी बसी है जैसे हम इस ब्रजभूमि में आते हैं, तो राधा रानी की जय कहने से अपने आपको वंचित नहीं कर पाते हैं और यह भाव पूर्वोत्तर के राज्यों में महारानी रूकमणी के साथ भी जुड़ा हुआ है। पूर्व से पश्चिम को जोड़ने का कार्य उस कालखण्ड में भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। राजकुमारी रूकमणी को वहां से लेकर और उनके शादी विवाह के बंधन कार्यक्रम द्वारिका के पास हुआ था। सुदूर समुन्द्र के तट पर।
श्रीराम ने त्रेता युग में उत्तर को दक्षिण से जोड़ने का कार्य किया था। उत्तर से दक्षिण की जो सीमायें भगवान श्रीराम ने हजारों वर्ष तय की थी। भारत की वही सांस्कृतिक सीमा आज राजनैतिक सीमा के रूप में भी है। 12 ज्योति लिंगों के माध्यम से पूरे भारत को एकता के सूत्र में जोड़ने के कार्य भगवान शिव के द्वारा अलग अलग स्थलों जिस श्रद्धाभाव के साथ भगवान शिव के प्रति भारत की आस्था आज भी जुड़ी हुई है। उन देवालयों एवं शिवालयों में भारत की आस्था उमड़ी हुई दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जब तक इन तीन के प्रति भारत की आस्था बनी रहेगी, दुनिया की कोई भी ताकत भारत का बालबांका नहीं कर पायेगा और आप सब सौभाग्यशाली हैं कि इस ब्रजभूमि के इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अध्ययन और अध्यापन का सौभाग्य आप सबको प्राप्त हुआ है और इस प्रक्रिया के साथ जोड़ते हुए आज यहां पर स्नातक, परास्नातक और डाॅक्टरेट की अपनी डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को यहां पर आज उपाधियों दी गई है। आप सबको मेरी बधाई एवं आप सबके मंगलमय भविष्य की मैं कामना करता हॅू।
उन्होंने कहा कि जो दीक्षांत समारोह है यह भारत की प्राचीन गुरूकुल परम्परा का समावर्तन समारोह का ही एक रूप है। सत्य बोलना है और धर्म का आचरण करना है। व्यक्ति का कोई भी वाक्य तब प्रभावशाली बनता है जब उसके आचार और विचार में समन्वय होता है। इसलिए सत्य बोलना और धर्म का आचरण करना जरूरी है। भारतीय मनीषा ने धर्म को कभी उपासना विधि के साथ जोड़कर के नहीं देखा। आप मन्दिर जायें या न जायें, पूजा करें या न करें यह आपका विषय है। आप पूजा खडे होकर करते हैं, बैठकर या लेटकर करते हैं यह आपका विषय है। इसके लिए भारतीय मनीषा ने कभी किसी को बाध्य नहीं किया। आस्था को किसी पर थोपने का प्रयास नहीं किया। हमने तो सबको जोड़ने का कार्य किया है। ज्ञान के लिए सभी दिशाओं को खुला रखो जहां से भी प्राप्त हो सकता है, हमने कभी नहीं कहा कि हमारे ग्रंथ में ही दुनिया का सारा ज्ञान है। भारतीय मनीषा ने कभी अपनी बात का दूसरों पर थोपने का प्रयास नहीं किया। ज्ञान के लिए सभी दिशायें खुली होनी चाहिए। भारतीय मनीषा की इसी बोधवाक्य को जीवन हिस्सा बनाकरके आज देश के यशस्वी मा0 प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के नौजवानों के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाई है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी भाव को लेकर है। हम केवल डिग्री तक ही सीमित न रहें। एक ही विषय की डिग्री लेने के लिए बाध्य न करें। हमें बहुआयामी सोच के साथ उसे आगे बढ़ाना है, उसे एक विस्तृत आयाम देना है और जहां भी उसे अपनी रूचि के अनुरूप कोई अच्छी चीज लगती है, तो उसको हमें आगे बढ़ाना होगा और भारतीय मनीषा की यह प्राचीनकाल से सोच रही है। दुनिया जब अंधकार में जी रही थी तब भारत के प्रतिष्ठित गुरूकुल यहां पर उत्कृष्ठ अध्यन और अध्यापन के केन्द्र बने हुए थे। जब साधन नहीं थे उस कालखण्ड में भी नालंदा-तक्षशिला जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भारत भूमि पर थे जो दुनिया को एक राह दिखा रहे थे। दुनिया के युवा वहां पर आकर स्नातक की उपाधि प्राप्त करके गौरव की अनुभूति करते थे। हम सबके लिए चुनौती होगी कि उस पुरातन गौरव को पुनः स्थापित करने के इस परिवर्तनमान अभियान का हम सब हिस्सा बनें। समाज और सरकार दोनों मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग दें।
कई बार ऐसा होता है कि हमें सोशल इम्पैक्ट स्टडी करवानी है जिसकेे लिए हमें बाहर की संस्था को चयनित करना पड़ता है।अब हमें अपनी स्थानीय संस्थाओं की फैकल्टी एवं छात्र-छात्राओं को तैयार करना चाहिए। हमें अपनी संस्थाओं में रिसर्च एवं स्टडी विभिन्न क्षेत्रों में करवानी चाहिए, जिसका समय आने पर सरकार भी प्रयोग कर सकती है। संस्थाओं में रिसर्च एवं स्टडी होगी तो फंड का फलो भी होगा और एक व्यवस्था भी आती दिखाई देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आभारी है प्रधानमंत्री जी के जिन्होंने 2014 में आने के बाद आयुष मंत्रालय का गठन किया। तब भी जिसकी समझ में नहीं आ रहा था कोरोना ने उनको समझा दिया कि काढ़े की कीमत क्या होती है। हल्दी का मतलब क्या होता है। उन्होंने कहा कि हल्दी हजारों वर्षों से भारत की रसोई का अभिन्न हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने योग को 21 जून की तिथि को विश्व योग दिवस के रूप में वैश्विक मंच पर रखा। जिसके पीछे पूरी दुनिया भाग रही है। तब हमारी समझ में आया कि योग में भी यह गुण हैं। बहुत सारी समस्याओं का समाधान करने की क्षमता है। यह केवल शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए ही नहीं बल्कि बौद्धिक उन्नयन के लिए और विज्ञान को उस स्थिति में पहुॅचाने में सक्षम है, जहां पर विज्ञान की सीमायें समाप्त होती हैं और भारतीय मनीषा ने उन सीमाओं का भी अधिक्रमण किया है और वही अध्यात्म है। शिक्षण संस्थानों को भी इस क्षेत्र में कार्य करना होगा और उस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
योगी ने कहा कि हमें देश की प्रगति के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट के साथ-साथ उसकी अच्छी पैकेजिंग भी करनी होगी, जो दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर सके। हर एक चीज का अपना एक महत्व है, जिस प्रकार प्रोडक्ट जरूरी है उसी प्रकार पैकेजिंग भी एक विशेष अहमियत रखती है। विश्वविद्यालय ने अनेक क्षेत्रों में एक नया विकास किया है। जीएलए द्वारा 2010 में विश्वविद्यालय के रूप में अपने आपको स्थापित करना और विश्वविद्यालय के रूप में भी अच्छी फैकल्टी का चयन करके नई ऊंचाईयां प्राप्त की हैं और उसके परिणाम आज हम सबके सामने हैं। उन्होंने कहा कि जीएलए इनोवेशन तथा रिसर्च एण्ड डवलपमेंट का एक नया केन्द्र साबित हुआ है। विश्वविद्यालय में स्थापित नये कौशल एवं उद्यमिता विकास केन्द्र विकास में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को हम अपने पाठयक्रम का हिस्सा बनायें। छात्र-छात्राओं को सरकारी की योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए जिसके लिए विश्वविद्यालय एक टीम गठित कर सरकारी विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए बच्चों को लाभान्वित करें। अगर कोई छात्र स्टार्ट-अप करना चाहता है, परिवार के पास पैसा नहीं है, तो वह भटकता रहेगा, कोई मदद नहीं करेगा। लेकिन अगर उसे मालूम है कि पीएम मुद्रा योजना है, इस योजना के अन्तर्गत बैंक से सम्पर्क करूंगा तो बैंक मुझे सहयोग करेेगा तो आसानी से वह अपना स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए आगे बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना है, इसमें भी हम आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पीएम इन्टन्र्शिप की एक नई स्कीम निकाली गई है तथा प्रदेश सरकार द्वारा भी वैसी ही इन्टन्र्शिप स्कीम निकाली है। सरकार युवाओं को एक नया अवसर दे रही है कि वे इण्डस्ट्रीज के साथ जुड़े सकें। इण्डस्ट्रीज को हम बाध्य कर रहे हैं कि अपने कार्मिकों की संख्या में 02 से 03 प्रतिशत इन युवाओं को शामिल करें, आधा मानदेय आप दीजिए और आधा मानदेय सरकार देगी। इससे युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा और अनुभव भी मिलेगा। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं उनके लिए हर जनपद में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अन्तर्गत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग करायी जाती है, जिसमें यूपीएससी, यूपीपीसीएस, एसएससी, आईआईटी, नीट आदि की कोचिंग हैं। फिजिकल एवं वर्चुअल क्लास चलायी जा रही हैं। युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम एवं सामर्थ बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार दो करोड़ यूथ को टैबलेट एवं स्मार्टफोन उपलब्ध करवा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें स्टार्ट अप की नई संस्कृति को जन्म देना होगा। एमएसएमई का सबसे बड़ा बेस हमारे पास है, सरकार ने थोड़ा उसमें सपोर्ट किया। 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी के पास हैं। सरकार ने एमएसएमई के लिए स्कीम निकाली, जिसके कारण एमएसएमई ने आज यूपी को एक्सपोर्ट हब बना दिया है। उद्यमियों ने अपने सहयोग से उत्तर प्रदेश को एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित कर दिया है, आज एक लाख साठ हजार करोड़ रूपये का एक्सपोर्ट हो रहा है यूपी से।
श्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि हमें अपने विश्वविद्यालयों में वर्चुअल माध्यम से भी पढ़ाई एवं प्रशिक्षण करवाना चाहिए। कोरोना काल में वर्चुअल माध्यम से कई आईसीयू का संचालन किया गया। तकनीक का प्रयोग करते हुए हमें आगे बढ़ना चाहिए और उसका सकारात्मक प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की मंशा है कि इस 21वीं सदी का नेतृत्व भारत दुनिया को दे और जी20 समिट के माध्यम से वह अवसर भारत के पास आया है। भारत की इस ताकत का-भारत के प्रबंधन के कौशल को दुनिया ने माना है। जब स्पेनिस फलू आया था, तब बीमारी से कई गुना ज्यादा मौते भूख से हुई थी। कोरोना काल में कुछ मौते बीमारी से हुई-दुखद है, लेकिन भूख से मौत नहीं हुई। भूख से मौत रोकने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार ने पुख्ता व्यवस्था की। फ्री में टेस्ट भी था, फ्री में उपचार भी था और फ्री में वैक्सीन भी देश के प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध करवाने का कार्य हुआ था। पहलीबार हुआ है कि किसी महामारी के बाद वैक्सीन 9 महीने के अन्दर उपलब्ध हो जाये और एक नहीं दो-दो स्वदेशी वैक्सीन और दुनिया की सबसे प्रभावी वैक्सीन यह भारत देने में सफल हुआ है। यह भारत की एक नई उपलब्धी है। दुनिया में सबसे कम मृत्युदर तथा सबसे अच्छा प्रबंधन भारत का रहा है। भारत के प्रबंधन को दुनिया ने सराहा है।डब्लूएचओ जैसी संस्थाओं ने भी इसकी सराहना की है।
जी20 के माध्यम से हम अपने आपको वैश्विक मंच पर स्थापित कर सकते हैं। जी20 में 20 बड़े देश हैं, 60 प्रतिशत आबादी जहां निवास करती है, 75 प्रतिशत ट्रेड पर जिनका अधिकार है, 85 प्रतिशत जीडीपी पर भी जिनका अधिकार है और 90 प्रतिशत पेटेंट पर भी जिनका अधिकार है। जी20 से जुड़े हुए देश आज भारत के नेतृत्व में अगले एक वर्ष तक दुनिया के लिए तमाम प्रकार की योजना बनाने वाले हैं और इस दौरान उत्तर प्रदेश के अन्दर वह समिट होना है। हमें अपने आतिथ्य भाव से सभी जी20 देशों से आये लोगों का मन जीतना है, जिससे वह एक नया संदेश लेकर जायेंगे। वैश्विक स्तर पर भारत की एक नई छवि में निखार आयेगा।
उत्तर प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन होने वाला है। वर्ष 2018 में जब पहला ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट किया गया था, तब उत्तर प्रदेश में 4 लाख 68 हजार करोड़ के प्रस्ताव आये थे और लगभग 04 लाख करोड़ के प्रस्तावों को जमीनी धरातल पर उतारने पर सफल हुआ, जिसमें कोसीकलां स्थित पेप्सिको कम्पनी भी इन्ही प्रस्तावों में शामिल थी। इस साल के इन्वेस्टमेंट समिट में होने वाले निवेश इन सभी युवाओं के लिए रोजगार की अनन्त संभावनाओं को लेकर आगे जा रहा है। प्रदेश के युवाओं को अब देश के अन्दर ही अन्य जगहों पर नौकरी और रोजगार के लिए नहीं भागना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में अलग अलग 25 सेक्टरों में होने वाले निवेश लाखों नौकरियां लेकर आने वाला है और उसके लिए हम तैयार करें अपने आपको। विश्वविद्यालय इसके लिए युवाओं को तैयार करें, विश्वविद्यालयों को इनोवेशन, रिसर्च एण्ड डवलपमेंट के एक नये सेन्टर व हब के रूप में स्थापित करना है, यह आज की आवश्यकता है।
समारोह की शुरूआत शैक्षिक शोभायात्रा के आगमन, दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती वंदना से हुई। तत्पश्चात कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल द्वारा दीक्षांत समारोह के प्रारम्भ की उद्घोषणा की गयी। समारोह में गन्ना विकास एवं चीनी मील मंत्री लक्ष्मी नारायण चैधरी, उच्च शिक्षा विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी इलेक्ट्रोनिक एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय एवं आकाश एजूकेशनल सर्विसेज के अध्यक्ष जेसी चैधरी, कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, आरके एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, कुलाधिपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान, कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता, समकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, सेक्रेटरी सोसाइटी नीरज अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, आइक्यूएसी निदेशक प्रो. विशाल गोयल, रजिस्टार एके सिंह आदि उपस्थित रहे।

