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बुन्देलखण्ड की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का कार्य जोरों पर: आयुक्त ने की समीक्षा

झांसी//लोकेश मिश्रा

  झाँसी: बुन्देलखण्ड की अपार ऐतिहासिक सम्पदा को नष्ट होने से बचाने व संरक्षित करने के प्रयासों को एक नई दिशा मिली है। आयुक्त झाँसी मंडल डॉ अजय शंकर पांडेय द्वारा चलाई गई मुहिम से अब मंडल के तीनों जिलों के बुन्देलखण्ड के ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की खोज व उन्हें संरक्षित करने की दीर्घकालिक योजना पर कार्य करने के लिए सभी तहसीलों में एस डी एम की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया है जो इस दिशा में कार्य कर रही हैं। 

आयुक्त ने कहा कि इस अभियान का मूल उद्देश्य बुन्देलखण्ड (झाँसी मण्डल) की ऐतिहासिक धरोहरों की खोज कर उन्हें संरक्षित करना है। एक बार सूचनाएँ संकलित होने के उपरान्त विभिन्न संस्थाओँ के माध्यम से संरक्षण एवं शोध का कार्य कराया जायेगा ताकि चिरकाल तक इन्हें सुरक्षित कराया जा सके।

झाँसी मंडल में ऐतिहासिक एवं पुरातत्व महत्व के स्थलों एवं स्मारकों की सुरक्षा एवं विकास के लिए प्रभावी कार्यवाही हेतु आयुक्त ने तीनों जिलों में ग्राम, तहसील एवं जिला स्तर पर समिति के गठन हेतु निर्देश दिए थे. इसके अंतर्गत झाँसी, ललितपुर एवं जालौन की सभी तहसील की समितियों का गठन हो चुका है.

  मंडल के प्रमुख ग्रामों में विद्यमान स्मारकों एवं प्रमुख स्थानों की जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से आयुक्त ने गाँव-गाँव की गौरव गाथा तैयार करने का कार्य आरंभ कराया था जिसके चलते झाँसी में 70,  जालौन में 49 तथा ललितपुर से 50 स्थलों को चिन्हित कर उनका विवरण प्राप्त हो चुका है। आयुक्त ने इन सभी खोजी गई ऐतिहासिक विरासतओ के इतिहास लिखने और उन्हें संरक्षित करने की कार्यवाही के निर्देश दिए हैं आयुक्त ने बताया कि इन सभी स्मारकों के संरक्षण के लिए जिला स्तर पर उपलब्ध जिला खनन फंड तथा मनरेगा के तहत प्रस्ताव तैयार कर इनके संरक्षण का कार्य किया जाएगा। आयुक्त ने यह भी आदेश पारित किया है कि जिला खनन फंड का 10% धन केवल स्मारकों के संरक्षण में ही खर्च किया जाएगा। इस निर्णय का दूरगामी प्रभाव यह होगा कि संबंधित जनपद की चिन्हित इमारतों व उसके आसपास के क्षेत्रों को संरक्षण व सौंदर्यीकरण के लिए धन उपलब्ध हो सकेगा।


दिगारा गढ़ी होगी अतिक्रमण मुक्त👇
झांसी नगर के प्रवेश से ठीक पहले नेशनल हाईवे पर स्थित ऐतिहासिक महत्व की इमारत दिगारा गढ़ी के आसपास अतिक्रमण किए जाने की शिकायत सामने आने पर आयुक्त ने गंभीर व सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं कि संबंधित भू माफिया के विरुद्ध कठोर कार्यवाही कर इसे अतिक्रमण मुक्त किया जाए।
आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अभियान चलाकर चिन्हित ऐतिहासिक धरोहरों के क्षेत्र को पूर्णता अतिक्रमण मुक्त कराया जाये। आरोपियों के विरूद्ध एफ.आर.आई. दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जाये, यह भी ध्यान रखा जाये कि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो।

बैठक में जिलाधिकारी झाँसी रविन्द्र कुमार, अपर आयुक्त प्रशासन सर्वेश कुमार दीक्षित, सांस्कृतिक समितियों के संयोजक मण्डलीय परियोजना प्रबंधक, एन.एच.एम. आनन्द चौबे, उप निदेशक पुरातत्व एस के दुबे तथा वर्चुअल माध्यम से मंडल के सभी जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

अब तक की गई कार्यवाही-
1- ऐतिहासिक स्थलों की खोज में 169 सूची तैयार की गई है।
2- मंडल के तीनों जनपदों में ऐतिहासिक स्थलों की खोज के बाद संरक्षण के प्रस्ताव हो रहे तैयार।
3- अडॉप्ट हेरिटेज’ के तहत बरूआ सागर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
4- धनाभाव में खंडहर नहीं होंगी ऐतिहासिक धरोहरें।
5- जिला खनन कोष में उपलब्ध फण्ड का 10 प्रतिशत ऐसी इमारतों के संरक्षण में उपभोग के निर्देश।
6- पुरानी धरोहरों के संरक्षण व सौन्दर्यीकरण का दायित्व जिला पंचायत को सौंपा गया, होगी फण्ड की व्यवस्था।
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